आत्मा को अत्यन्त सुन्दर, शुद्ध चैतन्यस्वरूप सुन लेने पर भी यदि मनुष्य इन्द्रिय-भोगों में अत्यधिक आसक्त रहता है, तो उसका मन मलिन (अशुद्ध) हो जाता है।

quote status3 months

आत्मा को अत्यन्त सुन्दर, शुद्ध चैतन्यस्वरूप सुन लेने पर भी यदि मनुष्य इन्द्रिय-भोगों में अत्यधिक आसक्त रहता है, तो उसका मन मलिन (अशुद्ध) हो जाता है।

Bharoselal Kushwaha

Bharoselal Kushwaha

View profile

87 views4 downloads

Comments

More Religion statuses

Categories

हर त्याग को दुनिया समझे, यह जरूरी नहीं होता। इसलिए सेवा करते समय लोगों की सोच नहीं, अपने मन की सच्चाई को सुनिए। क्योंकि सच्चा कर्म अंततः ईश्वर और समय की नजर में ही पहचाना जाता है। विष्णु पद...✍️

bishnu mahapatra
56 1
हर त्याग को दुनिया समझे, यह जरूरी नहीं होता। इसलिए सेवा करते समय लोगों की सोच नहीं, अपने मन की सच्चाई को सुनिए। क्योंकि सच्चा कर्म अंततः ईश्वर और समय की नजर में ही पहचाना जाता है। विष्णु पद...✍️